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KAHAT KABIR

Unknown Author
4.9/5 (11772 ratings)
Description:कबीर हमारी पूरी काव्य परम्परा की सबसे 'साहसी और दो टूक' आवाज हैं, उनमें अनगढ़ता और खुरदुरापन है, लेकिन उनकी सहजता और सच्चाई ऐसा परिष्कार रचती है जिसमें सारा अनगढ़पन खो जाता है और खुरदुरापन प्रिय हो उठता है। वे जाति, वर्ण, नस्ल आदि भेदभावों के कट्टर विरोधी लेकिन एक सच्चे आदमी के हृदय में फूटती प्रार्थना का सम्मान करने वाले संत हैं, इसलिए वे हमारी परम्परा के सबसे प्रामाणिक प्रतिपक्ष हैं। कबीर एक व्यावहारिक और प्रायोगिक धर्म प्रस्तावित करते हैं जिसमें प्रचलित धर्म, ईश्वर, ग्रंथ, मंदिर और प्रार्थना, तीर्थ और व्रत, दान और पुण्य कुछ भी काम नहीं आते। वे हमारी पहचानें मिटाने उत्सुक हैं, जिनकी धुंध और धूल में हमारी सबसे गहरी और वास्तविक पहचान खो गई है। वे धर्म और ईश्वर के लिए बाहर की ओर जाने वाली सारी यात्राओं को हमारी अपनी ओर मोड़ देने का उपक्रम करते हैं। हमारी लोक परम्परा ने कबीर की इस पुकार को बहुत आदर और प्रेम से सुना है, हृदय में धारण किया है और सदियों तक इस महान संत की वाणी के सार को उन बोलियों में गाया है, जिन्हें वे जानते थे, बोल और समझ सकते थे।We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with KAHAT KABIR. To get started finding KAHAT KABIR, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed.
Our library is the biggest of these that have literally hundreds of thousands of different products represented.
Pages
Format
PDF, EPUB & Kindle Edition
Publisher
Release
ISBN
8193771303

KAHAT KABIR

Unknown Author
4.4/5 (1290744 ratings)
Description: कबीर हमारी पूरी काव्य परम्परा की सबसे 'साहसी और दो टूक' आवाज हैं, उनमें अनगढ़ता और खुरदुरापन है, लेकिन उनकी सहजता और सच्चाई ऐसा परिष्कार रचती है जिसमें सारा अनगढ़पन खो जाता है और खुरदुरापन प्रिय हो उठता है। वे जाति, वर्ण, नस्ल आदि भेदभावों के कट्टर विरोधी लेकिन एक सच्चे आदमी के हृदय में फूटती प्रार्थना का सम्मान करने वाले संत हैं, इसलिए वे हमारी परम्परा के सबसे प्रामाणिक प्रतिपक्ष हैं। कबीर एक व्यावहारिक और प्रायोगिक धर्म प्रस्तावित करते हैं जिसमें प्रचलित धर्म, ईश्वर, ग्रंथ, मंदिर और प्रार्थना, तीर्थ और व्रत, दान और पुण्य कुछ भी काम नहीं आते। वे हमारी पहचानें मिटाने उत्सुक हैं, जिनकी धुंध और धूल में हमारी सबसे गहरी और वास्तविक पहचान खो गई है। वे धर्म और ईश्वर के लिए बाहर की ओर जाने वाली सारी यात्राओं को हमारी अपनी ओर मोड़ देने का उपक्रम करते हैं। हमारी लोक परम्परा ने कबीर की इस पुकार को बहुत आदर और प्रेम से सुना है, हृदय में धारण किया है और सदियों तक इस महान संत की वाणी के सार को उन बोलियों में गाया है, जिन्हें वे जानते थे, बोल और समझ सकते थे।We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with KAHAT KABIR. To get started finding KAHAT KABIR, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed.
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PDF, EPUB & Kindle Edition
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Release
ISBN
8193771303
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